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कौन है रघु, जिनके सामने सूर्या ने झुकाया सिर, सचिन से लेकर धोनी-विराट तक कायल
भारतीय क्रिकेट के 'मिस्टर 360' सूर्यकुमार यादव एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार अपने किसी लैप शॉट के लिए नहीं, बल्कि अपनी सादगी के लिए। जनवरी 2026 में एक शानदार मैच जिताऊ पारी खेलने के बाद, सूर्या डगआउट में सीधे टीम के थ्रोडाउन स्पेशलिस्ट राघवेंद्र द्विवेदी (रघु) के पास पहुंचे और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
2/8/2026
भावुक कर देने वाला पल
यह पल भावुक कर देने वाला था क्योंकि सूर्या लंबे समय से खराब फॉर्म से जूझ रहे थे। उन्होंने जीत का श्रेय खुद को न देकर रघु की उन घंटों की मेहनत को दिया, जो उन्होंने नेट्स में 150+ किमी/घंटा की रफ्तार से गेंदें फेंककर सूर्या को अभ्यास कराने में की थी।
कौन हैं राघवेंद्र द्विवेदी (रघु)?
राघवेंद्र द्विवेदी, जिन्हें टीम इंडिया में प्यार से 'रघु' बुलाया जाता है, भारतीय टीम के सबसे पुराने और भरोसेमंद थ्रोडाउन स्पेशलिस्ट हैं।
मूल निवासी: वह कर्नाटक के कुमटा के रहने वाले हैं।
काम: उनका मुख्य काम 'साइडआर्म' (एक विशेष उपकरण) की मदद से बल्लेबाजों को नेट्स में तेज गति और सटीक लाइन-लेंथ पर अभ्यास कराना है।
महत्व: वह दुनिया के उन चुनिंदा लोगों में से हैं जो लगातार घंटों तक 145-150 किमी/घंटा की रफ्तार से थ्रोडाउन फेंक सकते हैं, जिससे बल्लेबाजों को विदेशी पिचों की तैयारी में मदद मिलती है।
क्या रघु क्रिकेटर रहे हैं?
हाँ, रघु का क्रिकेटर बनने का सपना ही उन्हें इस मुकाम तक लाया है। वह एक क्रिकेटर बनना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने अपना घर तक छोड़ दिया था। वह क्लब क्रिकेट खेलने के लिए मुंबई आए और फिर बेंगलुरु के हुबली में अपनी किस्मत आजमाई। हालाँकि, वह एक पेशेवर खिलाड़ी के रूप में भारतीय टीम तक नहीं पहुँच सके, लेकिन क्रिकेट के प्रति उनके जुनून ने उन्हें कोचों की नजर में ला दिया। वह काफी समय तक NCA (नेशनल क्रिकेट एकेडमी) में रहे और धीरे-धीरे भारतीय टीम के मुख्य सेटअप का हिस्सा बन गए।
जब धोनी और कोहली ने भी दिया था सम्मान
यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़े खिलाड़ी ने रघु के प्रति इस तरह का सम्मान दिखाया हो। रघु को टीम का 'अनसंग हीरो' माना जाता है।
एमएस धोनी: खबरों के मुताबिक, धोनी रघु को बहुत मानते थे। एक बार अभ्यास सत्र के दौरान जब रघु के पास सही किट नहीं थी, तब धोनी ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से मदद की थी। कई मौकों पर धोनी ने उनके काम की सराहना सार्वजनिक रूप से की है।
विराट कोहली: कोहली ने तो एक इंटरव्यू में यहाँ तक कहा था कि, "मेरी सफलता के पीछे रघु का बहुत बड़ा हाथ है। नेट्स में उनकी 150 की रफ्तार वाली गेंदों का सामना करने के बाद मैच में खेलना आसान हो जाता है।"
सचिन तेंदुलकर: सचिन भी रघु की मेहनत के कायल रहे हैं और उन्होंने भी कई बार रघु के योगदान को टीम की जीत का आधार बताया है।
पैर छूने की परंपरा: इससे पहले भी नेट्स में अभ्यास के दौरान कई युवा खिलाड़ियों को रघु का आशीर्वाद लेते देखा गया है, क्योंकि टीम में उन्हें एक कर्मचारी नहीं, बल्कि एक 'गुरु' का दर्जा दिया जाता है।


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