Ind Vs NZ Fourth T-20 कीवियों ने भारत को उसी के दांव से पछाड़ा, 'स्ट्राइक रेट' की जंग में पस्त हुई टीम इंडिया

भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए चौथे टी-20 मुकाबले में मेजबान न्यूजीलैंड ने भारत की ही आक्रामक बल्लेबाजी वाली रणनीति अपनाकर मेहमान टीम को चारों खाने चित कर दिया। भारत, जो अक्सर अपनी 'फियरलेस' बल्लेबाजी के लिए जाना जाता है, इस मैच में न्यूजीलैंड के प्रहार के आगे बेबस नजर आया। न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 215 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया, जिसके जवाब में भारतीय टीम मात्र 165 रनों पर सिमट गई।

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1/29/20261 मिनट पढ़ें

न्यूजीलैंड का 'भारतीय फॉर्मूला': ताबड़तोड़ स्ट्राइक रेट

इस मैच में न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों ने ठान लिया था कि वे क्रीज पर समय बिताने के बजाय पहली गेंद से ही प्रहार करेंगे। कीवी टीम की ओर से स्ट्राइक रेट का ऐसा तूफान आया कि भारतीय गेंदबाज दिशाहीन नजर आए।

न्यूजीलैंड की पारी का लेखा-जोखा:
  • डेवोन कॉनवे (191.30) और टिम सीफर्ट (172.22) ने शुरुआत में ही भारतीय स्पिनर्स और तेज गेंदबाजों की लय बिगाड़ दी।

  • निचले क्रम में डेरिल मिचेल (216.66) और जैक फॉल्क्स (216.66) ने भारतीय डेथ ओवर्स की गेंदबाजी की धज्जियां उड़ा दीं।

स्ट्राइक रेट की तुलना: 7 बनाम 3 का फासला

मैच का सबसे बड़ा अंतर स्ट्राइक रेट में रहा। जहां न्यूजीलैंड के लगभग हर बल्लेबाज ने 150+ की रफ्तार से रन बनाए, वहीं भारतीय टीम की ओर से केवल गिने-चुने खिलाड़ी ही संघर्ष कर सके।

टीम150+ स्ट्राइक रेट वाले बल्लेबाज
न्यूजीलैंड (7) कॉनवे (191), सीफर्ट (172), फिलिप्स (150), मिचेल (216), सैंटनर (183), फॉल्क्स (216), हेनरी (200)
भारत(3) संजू सैमसन (160), शिवम दुबे (282), जसप्रीत बुमराह (200)

नोट: भारत की ओर से शिवम दुबे (65 रन, 282.60 SR) ने अकेले दम पर मैच पलटने की कोशिश की, लेकिन दूसरे छोर से किसी ने 150 के स्ट्राइक रेट को छूने की जहमत नहीं उठाई। कप्तान सूर्यकुमार यादव (100 SR) और हार्दिक पांड्या (40 SR) जैसे दिग्गजों का बल्ला शांत रहना भारत की हार की मुख्य वजह बना।

कहां चूक गई टीम इंडिया?

भारत की हार की सबसे बड़ी वजह पार्टनरशिप में स्ट्राइक रेट का अभाव रही। रिंकू सिंह ने 30 गेंदें लीं लेकिन उनका स्ट्राइक रेट 130 ही रहा, जो 216 रनों के लक्ष्य का पीछा करने के लिए नाकाफी था। वहीं, न्यूजीलैंड के 7 बल्लेबाजों ने 150 से अधिक के स्ट्राइक रेट से खेलकर यह साबित कर दिया कि टी-20 फॉर्मेट में अब केवल टिकना नहीं, बल्कि 'उड़ना' जरूरी है।